संदेश

World Earth Day

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कोरोना संक्रमण के बीच निखर रही पृथ्वी की छवि आजकल सुबह की हवाओं में कुछ अलग ही बयार बह रही है। उठते ही मन प्रसन्न और तरोताज़ा हो जाता है। ऐसा लगता है कि जिस प्रकृति के प्रति हम अपने लगाव को कहीं ना कहीं भूल गए थे वहीं कुद़रत हमें गले लगाने को आतुर हो रही है। जिस प्रकृति को हम इंसानों ने धुमिल कर दिया था, आज उन्हीं इंसानों के घरों में रहने के कारण कुद़रत की छवि निखर रही है। एक तरफ जहां वैश्विक महामारी बन चुका कोरोना वायरस का बढ़ता संक्रमण चिंता का विषय है तो वहीं दूसरी तरफ इन सब के बीच कुद़रत का निखरता स्वरूप ना केवल दिल को सुकून देने वाला है बल्कि दिमाग को आत्मसात करने वाला भी है। कोरोना महामारी से दुनिया के तमाम देशों में लॉकडाउन होने के कारण करोड़ों लोग अपने घरों में रह रहे है। इसकी वजह से बेश़क लोगों को कई प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन ऐसे समय में हमारी प्रकृति मुस्कुरा रही है। आसमान के सुन्दरता की चमक निखर रही है, हवाओं के बयार में अलग तरह की खुशबू का एहसास है साथ ही नदियां स्वच्छता की हिलोरे मार धरती को पावन बना रही है। जिस पतित पावनी गंगा की सफाई...

Corona insights

क्या प्रकृति से खिलवाड़ का नतीज़ा है कोरोना वायरस का प्रकोप ? कहते हैं प्रकृति ईश्वर का वरदान है और जब-जब प्रकृति से खिलवाड़ किया जाता है तो उसका परिणाम भी भुगतना ही पड़ता है। कभी विकास के नाम पर हरे-भरे पेड़-पौधों को काटना तो कभी धरती के मृदा संरक्षण को विकृत करना प्रकृति द्वारा दुनिया के दिए वरदान का दोहन करना है। निर्दोष जानवऱ, पक्षी और समुद्री जीवों को भी हमारी तरह जीने का अधिकार है लेकिन जब हम इनके अधिकारों का हनन करके खुद को सर्वोपरी समझ लेते हैं तो प्रकृति के प्रकोप का शिकार हमें बनना ही पड़ता है। आज पूरी दुनिया में कोरोना के कहर से लोग सहम गए हैं, लेकिन जानवरों से इंसानों तक इस वायरस को पहुंचाने का जिम्मेदार चीन है जिसकी गलतियों का परिणाम आज पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। दुनिया में कोरोना वायरस का लगातार बढ़ता संक्रमण कहीं न कहीं प्रकृति का इशारा है कि अगर प्रकृति से खिलवाड़ किया जाएगा तो दुनिया को परिणाम भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। इस वायरस के फैलने के वैसे तो कई कारण है लेकिन इसका सबसे बड़ा कारण है चीन में खाया जाने वाला भोजन। शायद लोगों को यह जानकर हैरानी होगी ...

World water day

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विश्व जल दिवस: जल और जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया में तेज़ी से पांव पसार रही वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से लड़ाई में इंसानो के लिए सबसे बड़ा वरदान बनी सफाई जिस द्रव पदार्थ के कारण संभव हो पा रही है, वह है जल। जल है तो पर्यावरण है और पर्यावरण है तो शुद्ध जलवायु है। साथ ही शुद्ध जलवायु है तभी इंसान का तन-मन स्वस्थ है। जल है तो जीवन है। लेकिन कभी सोचा है कि हमें जरूरत पड़ने पर यह जल न मिल पाए तो हमारा जीवन कैसा होगा ? डब्ल्यूएचओ की साल 2019 की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के एक तिहाई लोगों को पीने का शुद्ध जल नही मिल पाता, जिसमें दुनिया की 2.2 अरब आबादी आती है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखने हुए हर साल 22 मार्च को 'विश्व जल दिवस' मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य जल की हर एक बूँद को बचाना और प्रकृति के इस अनमोल वरदान के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना है। साल 2020 के लिए 'विश्व जल दिवस' का थीम "जल और जलवायु परिवर्तन" रखा गया है, जो एक-दूसरे के पूरक है। जल और जलवायु परिवर्तन एक सिक्के के दो पहलू है। जलवायु परिवर्तन की समस्या पूर्ण रूप से जल से जुड़ी हुई है। जिसने...

Successfully done janta curfew

एक सूत्र में पिरोया दिखा पूरा भारत पूरी दुनिया के लिए खतरा बन चुके कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए रविवार को भारत एक सूत्र में पिरोया हुआ नज़र आया। देश के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर जनता कर्फ्यू के दौरान जिस तरह से खुद को घरों में सीमित रखा, वह लोगों के सामूहिक संकल्प शक्ति की अभूतपूर्व और अद्भुत मिसाल है। देश में यह मिसाल इसलिए कायम हो सकी,क्योंकि देश की जनता ने संकट की इस घड़ी में संयम और अनुशासन का परिचय दिया। इस जनता कर्फ्यू के दौरान लोगों ने न केवल संयम का उदाहरण पेश किया, बल्कि शाम को 5 बजते ही अपने-अपने अंदाज़ में उन सभी का अभिनंदन और आभार भी व्यक्त किया जो ऐसी स्थिति में भी लोगों के जीवन की रक्षा के लिए दिन-रात बिना किसी स्वार्थ के लगे हुए हैं। न केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में तेज़ी से पांव पसार रहे खतरनाक कोरोना वायरस से हमारी सुरक्षा करने वाले चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और पुलिस कर्मियों के साथ उन सबका अभिनंदन करना बेहद आवश्यक था, जो हमारे लिए जरूरी सेवाओं को व्यवस्थित रूप से चलाने में एकजुटता से काम कर रहे हैं।  देश के लोगों ने जनत...

Nirbhya Verdict

निर्भया के भय का हुआ अंत, आत्मा को मिली शांति साल 2012 की वो खौफनाक रात, जिसने देश को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया, कोई नहीं भूल सकता है। आज एक बार फिर उस दर्दनाक रात की यादें ताजा हो गई, जब सुबह-सुबह निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटका दिया गया। 7 साल 3 महीने के इंतजार के बाद आखिरकार देश की बेटी निर्भया को इंसाफ मिल ही गया। खैर 7 साल का समय कम नहीं होता है उस परिवार के लिए, जिसने अपनी संतान को खोया और इंसाफ के लिए 7 साल से अधिक संघर्ष किया। इस संघर्ष में ना जाने कितने दिन और साल गुजर गए। बेशक निर्भया अब वापस नहीं आ सकती है, लेकिन अपने दोषियों की फांसी से आज उसकी आत्मा को शांति जरूरी मिली होगी। 16 दिसंबर 2012 की उस रात को केवल निर्भया के साथ दरिंदगी नहीं हुई बल्कि मानवता भी शर्मशार हुई, लेकिन कई मुश्किलों और परेशानियों के बाद निर्भया को इंसाफ मिल गया। निर्भया को सात साल से ज्यादा का वक्त लग गया लेकिन उसे इंसाफ मिला, इसके साथ ही देश में अभी भी प्रतिदिन बलात्कार की घटना तेजी से सामने आती रहती है। जिनमें से कई लोग तो रिपोर्ट भी नहीं करते, जिसके कारण कई मामलें सामने नही आ ...

Delhi Violence

दिल्ली   हिंसा में हुई   मौतों का कौन है जिम्मेदार ? CAA ( नागरिकता संशोधन कानून) के विरोध में देश  की राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा ने 40 से अधिक लोगों की जिंदगी को लील लिया। दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के दौरान देश की राजधानी में हुई इस प्रकार की हिंसा, भारत की छवि को किसी ना किसी प्रकार से दुनिया के सामने धुमिल करने का कार्य करती है। हालांकि सरकार ने इसके लिए अच्छी कोशिश की अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने देश की छवि धुमिल ना हो और सरकार काफी हद तक इसमें कामयाब भी रही। लेकिन बात यह है कि क्या दिल्ली की हिंसा को रोकने और दुनिया के सामने देश की छवि को उज्जवल करने की जिम्मेदारी केवल सरकार की है। देश के प्रति आम नागरिक और दिल्ली की सरकार एवं न्यायालय की कोई जिम्मेदारी नहीं है।      क्यों हुई हिंसा देश में CAA ( नागरिकता संशोधन कानून) कानून को लागू ना करने को लेकर शुरु हुए विरोध प्रदर्शन ने कब हिंसा का रूप अख्तियार कर लिया, किसी को पता नहीं चला। हमारे देश में बेसक लोकतंत्र है और सभी को अपनी बात रखने...

view on forest fire

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देश   में जंगलों का दायरा बढ़ने के साथ आग लगने की घटनाओं में आई कमी पुरी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिग की समस्या से परेशान है। दुनिया के कई देश ग्लोबल वॉर्मिग के कारण बिना मौसम बरसात और बाढ़ जैसी समस्या से जुझ रहा है, तो कहीं खतरनाक गर्मी से लोगों का जीना बेहाल हो गया है। ग्लोबल वॉर्मिग के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे है, तो कहीं जंगलों में लगातार लग रही आग एक बड़ी समस्या बनकर सामने आ रहे है। ऐसे समय में भारत   को बड़ी कामयाबी मिली है। भारत के वन क्षेत्र के दायरे में इजाफा हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा वन क्षेत्र की स्थिति रिपोर्ट   के मुताबिक   पिछले दो   सालों में देश के हरित क्षेत्र में   5,188 वर्ग कि लोमीटर की बढ़ोतरी हुई है।   इसमें वन क्षेत्र और वन से   अलग   पेड़ों का हरित क्षेत्र भी शामिल है।   इसके साथ ही   भारत के कुल फॉरेस्ट कवर में भी पिछले 2 सालों में 0.56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इन आंकड़ो के कारण भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां वन और ट्री कवर दोनों में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। रिपोर्ट ...