World Earth Day

कोरोना संक्रमण के बीच निखर रही पृथ्वी की छवि


आजकल सुबह की हवाओं में कुछ अलग ही बयार बह रही है। उठते ही मन प्रसन्न और तरोताज़ा हो जाता है। ऐसा लगता है कि जिस प्रकृति के प्रति हम अपने लगाव को कहीं ना कहीं भूल गए थे वहीं कुद़रत हमें गले लगाने को आतुर हो रही है। जिस प्रकृति को हम इंसानों ने धुमिल कर दिया था, आज उन्हीं इंसानों के घरों में रहने के कारण कुद़रत की छवि निखर रही है। एक तरफ जहां वैश्विक महामारी बन चुका कोरोना वायरस का बढ़ता संक्रमण चिंता का विषय है तो वहीं दूसरी तरफ इन सब के बीच कुद़रत का निखरता स्वरूप ना केवल दिल को सुकून देने वाला है बल्कि दिमाग को आत्मसात करने वाला भी है।

कोरोना महामारी से दुनिया के तमाम देशों में लॉकडाउन होने के कारण करोड़ों लोग अपने घरों में रह रहे है। इसकी वजह से बेश़क लोगों को कई प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन ऐसे समय में हमारी प्रकृति मुस्कुरा रही है। आसमान के सुन्दरता की चमक निखर रही है, हवाओं के बयार में अलग तरह की खुशबू का एहसास है साथ ही नदियां स्वच्छता की हिलोरे मार धरती को पावन बना रही है। जिस पतित पावनी गंगा की सफाई के लिए तमाम सरकारों द्वारा अरबों रूपये खर्च किए जाते रहे है, इसके बावजूद कई शहरों की गंगा का जल आचमन योग्य भी नही हो सका, वह पावनी गंगा लॉकडाउन के कारण ना केवल स्वच्छ हुई है बल्कि ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा नदी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा में 1% की वृद्धि भी हुई है। इसके साथ ही लॉकडाउन से कई शहरों में गंगा का पानी आचमन योग्य भी हो गया है। देश के सबसे प्रदूषित नदियों में शुमार गंगा और यमुना अब स्वच्छता की हिलोरे मार रही है। साथ ही वायु प्रदूषण के कारण जो आसमान धुमिल हो गया था वह इतना अधिक स्वच्छ हो गया है कि अब आसमान अपनी छटा बिखेर रहा है।

हरिद्वार में गंगा के साफ होने से दिख रही सतह 


भारत के केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार देश में लॉकडाउन होने के कारण वायु प्रदूषण के स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक देश की राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता "अच्छी" श्रेणी में है। इसके साथ ही कानपुर शहर में, जिसका प्रदूषण स्तर बहुत अधिक है, वह "संतोषजनक" श्रेणी में आ गया है। इसके अलावा देश के लगभग 92 अन्य शहरों में न्यूनतम वायु प्रदूषण दर्ज किया है, जिसमें हवा की गुणवत्ता "अच्छी" से "संतोषजनक" श्रेणी में है। इसका ही परिणाम है कि जालंधर से 200 किलोमीटर दूर हिमाचल प्रदेश का धौलाधर पर्वत पूरी तरह साफ दिख रहा है। दुनिया के तमाम देशों में औद्योगिक गतिविधियां बंद होने से ओजोन परत में बहुत तेजी से सुधार आया है। एक शोध के मुताबिक ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाली रासायनिक गैसों के उत्सर्जन में भारी कमी होने से ऐसा संभव हुआ है। इसका असर अंटार्कटिका के ऊपर वायुमंडल में भी हुआ है और वायुमंडल में बनने वाला भंवर भी सही जगह पर आने लगा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बदलाव के बाद वर्षा चक्र में भी अच्छा परिवर्तन होने की उम्मीद है।

पंजाब के जालंधर से दिख रहा हिमाचल प्रदेश का धौलाधर पर्वत

ओजोन परत में क्यों है सुधार की जरूरत
पृथ्वी के वायुमंडल की पहली परत क्षोभमंडल के ऊपर ओजोन की परत होती है, जो पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी तक आने से रोकती है। ये पराबैंगनी किरणें इंसानों की आंखों और त्वचा को बड़ा नुकसान पहुंचाती हैं। इसकी वजह से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।
लॉकडाउन से साफ होती आसमान की फिज़ा


पूरी दुनिया में फैली वैश्विक कोरोना महामारी को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन से प्रकृति को अभूतपूर्व फायदा हुआ है। हवा और पानी को शुद्ध करने के लिए सरकारों द्वारा करोड़ों का बजट खर्च करने के बावजूद जो काम दशकों में नहीं हो पाया, वह इस लॉकडाउन ने कर दिखाया है।

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