वर्चुअल स्टडी : बच्चों के लिए वरदान या अभिशाप

 

कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया के लोगों के जनजीवन को अस्त-वयस्त कर दिया है। इस महामारी ने देशों की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ लोगों की जीवनशैली पर भी गहरा असर डाला है। सभी सरकार द्वारा कोरोना के संक्रमण को रोकने और कम करने के लिए लॉकडाउन और फिर कर्फ्यू लगाया गया, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि इस नुकसान को कम करने के लिए ऑनलाइन क्लास की शुरुआत की गई है, लेकिन इसकी वजह से बच्चों को कई प्रकार की समस्याएं हो रही है। जिसके विषय में जानना और समझना बेहद जरूरी है।

 

मानसिक तनाव: ऑनलाइन क्लास शुरू होने से बच्चों की पढ़ाई के नुकसान को तो एक हद तक कम कर लिया गया है। लेकिन लगातार लैपटॉप और मोबाइल पर देखने से बच्चों की आँखों पर भी असर पड़ा है। अधिक समय तक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के इस्तेमाल से बच्चों में अनिद्रा और तनाव की समस्या होती है। जिससे बच्चों की आंखों की रोशनी भी कम होने लगती है। एक स्टडी के मुताबिक ऑनलाइन क्लास में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल से कई बच्चें डिप्रेशन का भी शिकार भी हो रहे है।

शारीरिक तनाव: वर्चुअल मोड में पढ़ाई के कारण बच्चों में मानसिक के साथ-साथ शारीरिक तनाव की समस्या भी होने लगी है। अधिक समय तक एक ही स्थान पर बैठने से बच्चों के शरीर में दर्द और अकड़न की शिकायत हो रही है। इस समस्या को दूर करने के लिए हमें बच्चों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए जिससे यह समस्या धीरे-धीरे किसी गंभीर बीमारी का रूप न ले लें।



स्किल में कमी: बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई से उनके लिखने और पढ़ने की क्षमता पर भी असर हुआ है। वर्चुअल मोड में पढ़ाई करने से बच्चें लिखने और पढ़ने की स्किल पर खासा ध्यान नहीं दे पाते,जिसके कारण उनकी यह स्किल कमज़ोर हो रही है। साथ ही किताबों से पढ़ाई न करने की वजह से उनके याद करने क्षमता भी कम हो रही है। ऑनलाइन क्लास ने बच्चों की पढ़ाई और उनके साल के नुकसान की भरपाई को तो कम कर दिया है,लेकिन उनकी स्वास्थ्य की हानि को बढ़ा दिया है।

ग़लत साइट का इस्तेमाल: लगातार इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल से बच्चें बाकी एक्टिविटी से दूर होने लगे है। उनकी लिखावट खराब होने के साथ ही क़िताबों से दूरी भी बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही बड़े बच्चें किसी न किसी गलत साइट को सर्च करने लगे है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

 

क्या है समाधान

  • बच्चों को वर्चुअल मोड से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए समय-समय पर बच्चें की पलकों को झपकाते रहें। इसाथ ही मोबाइल या लैपटॉप की ब्राइटनेस के कम करके रखें।
  • माता-पिता को थोड़ी-थोड़ी देर पर बच्चों को देखना चाहिए कि वो सच में ही पढ़ाई कर रहे है या नहीं।
  • साथ ही माता-पिता को बच्चों को खुशनुमा माहौल देना चाहिए जिससे पढ़ाई का तनाव कम लगे।
  • बच्चों को विटामिन से युक्त सब्जियों का सेवन करना चाहिए जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक कमियों को दूर करने में मदद मिल सकें।

वैसे तो अब पूरी दुनिया वर्चुअल मोड को ज़्यादा तवज्जों दे रही है साथ ही हमारे देश में भी इस क्षेत्र में काफी जोरो-शोरो से ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा पर तेज़ी से काम हो रहा है। कोरोनाकाल के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई में काफी तेज़ी आई है लेकिन साथ ही बच्चों को मानसिक, शारीरिक और स्किल की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। लेकिन बच्चों के माता-पिता अपने बच्चों के विशेष रूप से ध्यान रखकर इन समस्याओं से उन्हें निजात दिलाने में मदद कर सकते है।

 

 

 

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