view on forest fire

देश में जंगलों का दायरा बढ़ने के साथ आग लगने की घटनाओं में आई कमी



पुरी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिग की समस्या से परेशान है। दुनिया के कई देश ग्लोबल वॉर्मिग के कारण बिना मौसम बरसात और बाढ़ जैसी समस्या से जुझ रहा है, तो कहीं खतरनाक गर्मी से लोगों का जीना बेहाल हो गया है। ग्लोबल वॉर्मिग के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे है, तो कहीं जंगलों में लगातार लग रही आग एक बड़ी समस्या बनकर सामने आ रहे है। ऐसे समय में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। भारत के वन क्षेत्र के दायरे में इजाफा हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा वन क्षेत्र की स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो सालों में देश के हरित क्षेत्र में 5,188 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसमें वन क्षेत्र और वन से अलग पेड़ों का हरित क्षेत्र भी शामिल है। इसके साथ ही भारत के कुल फॉरेस्ट कवर में भी पिछले 2 सालों में 0.56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इन आंकड़ो के कारण भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां वन और ट्री कवर दोनों में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के कुल क्षेत्रफल में वन क्षेत्र की हिस्सेदारी 21.67 प्रतिशत हो गई है। 

पिछले पांच सालों के आकंड़ों की बात की जाए तो जहां एक तरफ दुनिया के कई हिस्से में जंगलों में आग लगने के कारण जंगलो का दायरा कम हो रहा है, वहीं भारत के वन क्षेत्र में 13 हज़ार वर्ग किलोमीटर का इज़ाफ़ा हुआ है। इस रिपोर्ट में देश के उत्सर्जित कार्बन में 2017 के आकलन की तुलना में 4.26 करोड़ टन की वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं भारत, सघन वन क्षेत्र, विरल वन क्षेत्र और सामान्य वन क्षेत्र, तीनों श्रेणियों में बढ़ोतरी दर्ज करने वाला दुनिया का एकमात्र देश बन गया है। लेकिन देश के पूर्वोत्तर के सभी इलाके में वन आच्छादित क्षेत्र में 0.45 प्रतिशत की कमी आना चिंता का विषय है। जंगलों के क्षेत्रफल का आकलन करने वाली आईएसएफआर की रिपोर्ट दो साल के अंतराल पर प्रकाशित की जाती है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत के वनों में आग लगने की घटनाओं में भी 20 प्रतिशत की कमी आई है। यह हमारे देश के लिए तो गर्व की बात है, साथ ही पूरी दुनिया और पर्यावरण के लिहाज से खासा महत्वपूर्ण है। क्योंकि आए देश दुनिया के किसी ना किसी हिस्से में जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही है, वहीं भारत में जंगलों में आग लगने की घटनाओं का कम होना राहत देने वाला है।

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी भीषण आग ने पुरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। इस आग ने ऑस्ट्रेलिया के बहुत बड़े हिस्से में तबाही मचाई, जिसने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के साथ ही जंगली जानवरों को भी अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी खतरनाक थी कि इसकी लपटों और धुएं से दिन में आसमान का रंग नारंगी, लाल और काले रंग में तब्दील हो गया था। इस आग में लाखों हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर खाक हो चुका है। इसके साथ बीस हजार से अधिक घर नष्ट हो गये हैं और बड़ी संख्या में लोगों को बेघर होना पड़ा है। इस आग ने लाखों बेजुबानों की जिदंगी को भी लील लिया। इसका एक महत्वपूर्ण कारण ऑस्ट्रेलिया में लगातार बढ़ता तापमान है।
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के जंगलों में लगभग हर साल लग रही आग पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। पिछले कई सालों से दुनिया के जंगलों में लग रही आग का कारण बढ़ता ग्लोबल वॉर्मिग और जलवायु परिवर्तन है। पिछले 35 सालों से दुनिया के तापमान में जबरदस्त वृद्धि हुई है, जिसके लिए सीधे तौर पर इंसान जिम्मेदार है। विकास के नाम पर जंगलों को काटना और प्रकृति को नुकसान पहुंचाना अब आदत सी बन चुकी है, जिसका भुगतान किसी ना किसी तरह इसानों और धरती के सभी सजीव प्राणियों को भुगतना पड़ता है। जंगलों में आग लगने के लिए एक हल्की चिंगारी ही काफ़ी होती है। ये चिंगारी जंगलों से गुज़रने वाली ट्रेनों के पहियों या पेड़ो की टहनियों की रगड़ से भी उत्पन्न हो सकती है। ग्लोबल वॉर्मिग के कारण लगातार बढ़ते तापमान के कारण सूरज की तेज़ किरणें और ठनक भी आग को बढ़ावा देती है। इसके साथ ही जंगलों में आग लगने का एक कारण इंसानों की लापरवाही भी है। इंसानों द्वारा जंगलों में पिकनिक के लिए प्रयोग किए गए कैंप फायर, सिगरेट का जलता टुकड़ा, पटाखें और माचिस की तिल्लियां भी आग को बढ़ावा देने के लिए काफी होता है।
ग्लोबल वॉर्मिग के कारण बारिश का कम होना, सूखे जैसी स्थिति, गर्म हवाओं का चलना और ज्यादा तापमान, ये सभी जंगलों में आग के लिए ज़िम्मेदार होते है। इसके साथ ही जैसे-जैसे प्राकृति का दोहन बढ़ रहा है, वातावरण में संतुलन बिगड़ रहा है। जिसके कारण बारिश कम होने के साथ गर्मी ज़्यादा होने लगी है, जिसके कारण जंगलों में आग लगने का ख़तरा बढ़ता जा रहा है।
इंसानों द्वारा प्रकृति का दोहन करने से जहां समस्याएं बढ़ रही है, वहीं इस समस्या से निदान भी इंसान के ही हाथ में है। ग्लोबल वॉर्मिग की समस्या से निपटने के लिए आरोप-प्रत्यारोप लगाना और किसी दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने से समस्या का सामाधन नही हो सकता। इससे मिपटने के लिए हमें स्वंय ही आगे बढ़ना होगा तभी यह समस्या जड़ से खत्म हो सकती है। कहा जाता है हर काम की शुरुआत अपने घर से होती है। इसकी शुरुआत भी हम अपने घर से कर सकते है, जिसमें अधिक से अधिक पेड़ लगाना, जल संरक्षण, बारिश के पानी के भंडारण और बिजली के उत्पादों का कम-से-कम इस्तेमाल कर ग्लोबल वॉर्मिग जैसी समस्या को खत्म कर सकते है। लेकिन इसकी शुरुआत स्वंय हमें करना होगा।

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