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नागरिकता देने और छीनने के बीच उलझा असल उद्देश्य
भारत के पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का बिल देश के उच्च सदन राज्यसभा से पारित होने के बाद कानून का रुप ले चुका है। साथ ही सरकार द्वारा इस कानून को पूरे देश में लागू करने की अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है। संसद के दोनो सदनों से नागरिकता कानून को पास होने के बाद भी देश के कई हिस्सों में इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे है। कई इलाकों में प्रदर्शन धीरे-धीरे हिंसक रूप लेता जा रहा है, जो बेहद अकल्पनीय प्रतीत होता है। इन सभी प्रदर्शनों की मुख्य वजह नागरिकता कानून को नही समझना कहा जाए तो कुछ गलत नही होगा। क्योंकि कई जगहों के प्रदर्शन के दौरान यह देखा गया है कि प्रदर्शन करने वाले लोगों को अपने प्रदर्शन करने के मुद्दों के बारे में भी नही पता है। लेकिन विपक्षी पार्टियों और देश को भ्रमित करने वाले लोगों के बहकावे में आकर लोग बिना जाने और बिना सोचे-समझे नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने में लगे है। इसका ताज़ा उदाहरण दिल्ली का शाहीन बाग इलाका है, जहां पिछले कई महीनों से महिलाएं CAA के खिलाफ प्रदर्शन करने में लगी है।
हालांकि उनका यह प्रदर्शन अब सियासी रूप ले चुका है, कई विपक्षी पार्टियां इस प्रदर्शन की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगी है। देश की सरकार यह पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि नागरिकता कानून लोगों को नागरिकता देने के लिए है ना की देश के लोगों की नागरिकता छीनने के लिए। लेकिन उसके बावजूद लोगों का उग्र प्रदर्शन और जामिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में नागरिकता कानून के समर्थन और विरोध में हिंसक गतिरोध कही ना कही सरकार की नीतियों पर सवाल भी खड़े करता है। आखिरकार इतने दिनों से इस कानून के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन और कई संगठनों द्वारा कानून के समर्थन और विरोध में पुलिस के सामने खुलेआम गोली चलना कहीं ना कहीं सरकार की प्रतिबद्धता पर सवालिया निशान है। साथ ही विभिन्न विपक्षी पार्टियों द्वारा इस प्रदर्शन की आड़ में आग में घी डालने के काम को भी सही नहीं ठहराया जा सकता है।
क्या है CAA
CAA यानी नागरिकता संशोधन कानून 2019 भारत के पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान द्वारा सताए और प्रताड़ित किए गए उस देश के अल्पसंख्यकों हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी एवं ईसाई धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता देने का बिल है। इस कानून के बनने से पड़ोसी देशों के प्रवासियों के लिए भारत की नागरिकता पाना का नियम आसान हो गया हैं। पहले के नागरिकता कानून के अनुसार किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम 11 साल तक भारत में रहना अनिवार्य था। लेकिन केन्द्र की सरकार द्वारा नागरिकता कानून में संशोधन के बाद इस नियम को आसान बनाकर नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर 6 साल किया गया है।जिसके बाद 1-6 सालों में भारत आकर बसे तीनों देशों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता मिल सकेगी। आसान शब्दों में कहा जाए तो भारत के तीन मुस्लिम बहुसंख्यक पड़ोसी देशों से आए गैर मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने के नियम को आसान बनाया गया है। देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी कहा था कि भारत के विभाजन के बाद पड़ोसी देशों में गए लोग जब चाहे तब भारत में आकर रहने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है।
इससे पहले साल 2016 में मोदी सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन बिल को संसद के दोनों सदनों में पेश किया गया था, जिसके बाद यह बिल संसद के निचले सदन लोकसभा में पास हो गया, लेकिन सरकार के पास बहुमत ना होने के कारण उच्च सदन राज्यसभा से पास नही हो पाया था।
क्या था 2016 के नागिरकता बिल में ?
भारत के नागरिकता कानून, 1955 में बदलाव के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 पेश किया गया था। यह विधेयक 19 जुलाई, 2016 को पेश किया गया था। इसमें भारत के तीन मुस्लिम पड़ोसी देशों बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों को बिना वैध दस्तावेज के भारत की नागरिकता देने का प्रावधान था। साथ ही इस विधेयक में भारत की नागरिकता लेने के लिए भारत में रहने की अवधि को 11 साल से घटाकर 6 साल कर दिया गया था।
कैसे मिलती है भारत की नागरिकता
संविधान के अनुसार किसी भी व्यक्ति को भारत की नागरिकता पाने के कई आधार है। जिसमें जन्म, पंजीकरण, वंश, देशीयकरण और भूमि-विस्तार के आधार पर नागरिकता देने का प्रावधान है। यह प्रावधान संविधान के नागरिकता अधिनियन 1995 के तहत धारा 3, 4, 5(1) और 5(4) में आता है।
जन्म के आधार परः सभी व्यक्ति जिनका जन्म भारत के संविधान लागू होने यानी 26 जनवरी, 1950 को या उसके बाद भारत में हुआ हो, वह जन्म से भारत का नागरिक कहलाता है।
वंश-परम्परा के आधार परः भारत के बाहर किसी अन्य देश में 26 जनवरी, 1950 के बाद जन्म लेने वाला व्यक्ति भी भारत का नागरिक माना जाएगा, यदि उसके जन्म के समय उसके माता-पिता में से कोई एक भारत का नागरिक हो।
देशीयकरण के आधार परः भारत की नागरिकता पाने के लिए भारत सरकार से देशीयकरण का प्रमाण-पत्र प्राप्त कर करके भी नागरिकता हासिल की जा सकती है।
पंजीकरण के आधार परः वह व्यक्ति जो पंजीकरण प्रार्थना-पत्र देने की तारीख से 6 महीने पहले से भारत में रहता हो, वह भारतीय जो अविभाज्य भारत से बाहर किसी देश में निवास कर रहा हों, वे स्त्रियां, जो भारतीयों से विवाह कर चुकी हैं या भविष्य में विवाह करने वाली है, भारतीय नागरिकों के नाबालिग बच्चे, राष्ट्रमंडलीय देशों के नागरिक, जो भारत में रहते हों या भारत सरकार की नौकरी कर रहें हों, आवेदन पत्र देकर भारत की नागरिकता आसानी से हासिल कर सकते हैं।
भूमि-विस्तार के आधारः किसी नए भू-भाग को भारत में शामिल किया जाता है, तो उस क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्तियों को स्वतः भारत की नागरिकता मिल जाती है।
नागरिकता कानून को लेकर हो रहे प्रदर्शन को शांत करने के लिए मोदी सरकार को सबसे पहले देश के हर एक नागरिक तक अपनी बात को पहुंचाना चाहिए। क्योंकि CAA के भारी प्रर्दशन के बीच में इस बिल के लाने का असल उद्देश्य खो रहा है, जिसका सरकार को भी ध्यान देने की जरुरत है। साथ ही सरकार को लोगों की बातों को भी समझना चाहिए। वैसे भी देश के प्रधानमंत्री पहले ही साफ कर चुके है कि किसी भी मुद्दे पर वाद-विवाद के लिए चर्चा होना बेहद आवश्यक है। जब देश की सरकार सदैव ही चर्चा के लिए तैयार रहती है तो लोगों को भी सरकार तक अपनी बात पहुंचाना चाहिए, लेकिन हर बार अपनी बात को सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शन का सहारा लेना भी सही कदम नहीं है। इससे देश के आमजनों को नुकसान होता है।

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